AIIMS जोधपुर कॉन्फ्रेंस 2026
AIIMS Jodhpur oncology conference में कैंसर उपचार की नई तकनीकों और रिसर्च पर चर्चा हुई। जानें पूरी जानकारी।
कॉन्फ्रेंस की झलक



प्रस्तावना
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच, कैंसर उपचार (ऑन्कोलॉजी) एक ऐसा क्षेत्र है जो निरंतर शोध, तकनीकी विकास और विशेषज्ञ सहयोग की मांग करता है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए AIIMS Jodhpur ने 21 और 22 मार्च 2026 को एक दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “नेक्स्टजेन ऑन्कोलॉजी” का आयोजन किया है।
यह सम्मेलन न केवल चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है, जहाँ देशभर के शीर्ष कैंसर विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्रित होकर नवीनतम उपचार तकनीकों, शोध और मरीजों की देखभाल के नए तरीकों पर चर्चा करेंगे।
AIIMS जोधपुर: संस्थान का परिचय



AIIMS जोधपुर भारत के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक है, जिसकी स्थापना का उद्देश्य देश में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं, शिक्षा और शोध को बढ़ावा देना है।
यह संस्थान आधुनिक उपकरणों, अनुभवी डॉक्टरों और उन्नत शोध सुविधाओं के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में AIIMS जोधपुर ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन आयोजित किए हैं, जिससे यह चिकित्सा शिक्षा और रिसर्च का एक प्रमुख केंद्र बन गया है।
सम्मेलन का उद्देश्य
इस “नेक्स्टजेन ऑन्कोलॉजी” सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है:
- कैंसर उपचार में नई तकनीकों की जानकारी साझा करना
- डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के बीच सहयोग बढ़ाना
- मरीज-केंद्रित उपचार (Patient-Centric Care) को बढ़ावा देना
- मल्टी-डिसिप्लिनरी दृष्टिकोण को मजबूत करना
यह सम्मेलन एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहाँ मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के विशेषज्ञ मिलकर विचार-विमर्श करते हैं।
कौन-कौन ले रहे हैं हिस्सा



इस सम्मेलन में देशभर से कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं:
- वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट (Cancer Specialists)
- सर्जिकल डॉक्टर
- रेडिएशन थेरेपी विशेषज्ञ
- मेडिकल छात्र और रिसर्च स्कॉलर
विशेषज्ञ अपने अनुभव और शोध प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी के डॉक्टरों को सीखने का अवसर मिल रहा है।
आधुनिक कैंसर उपचार तकनीकें
1. Targeted Therapy (लक्षित उपचार)

Targeted Therapy कैंसर के उन विशेष जीन या प्रोटीन पर काम करती है जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करते हैं।
👉 इसके फायदे:
- कम साइड इफेक्ट
- ज्यादा सटीक इलाज
- तेजी से रिकवरी
2. Immunotherapy (इम्यूनोथेरेपी)


Immunotherapy शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर कैंसर से लड़ने में मदद करती है।
👉 यह तकनीक आज कैंसर उपचार में क्रांति ला रही है और इस पर सम्मेलन में विशेष चर्चा की जा रही है।
मल्टी-डिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड की भूमिका



सम्मेलन में “Tumor Board” की भूमिका पर भी जोर दिया गया है।
यह एक टीम होती है जिसमें शामिल होते हैं:
- सर्जन
- ऑन्कोलॉजिस्ट
- रेडियोलॉजिस्ट
- पैथोलॉजिस्ट
👉 सभी मिलकर मरीज के लिए सबसे बेहतर इलाज तय करते हैं।
मरीज-केंद्रित देखभाल (Patient-Centric Care)



कैंसर उपचार केवल दवा तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज की मानसिक और भावनात्मक स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है।
सम्मेलन में इन पहलुओं पर चर्चा की गई:
- पेलिएटिव केयर (Palliative Care)
- मानसिक समर्थन
- परिवार की भूमिका
- जीवन की गुणवत्ता सुधार
👉 यह दृष्टिकोण मरीज को पूरी तरह से स्वस्थ बनाने में मदद करता है।
https://articlehub.in/decision-fatigue-kya-hai/
भारत में कैंसर की स्थिति
भारत में हर साल लाखों नए कैंसर मरीज सामने आते हैं।
मुख्य कारण:
- तंबाकू का सेवन
- प्रदूषण
- खराब जीवनशैली
- आनुवंशिक कारण
इस सम्मेलन में इन चुनौतियों से निपटने के उपायों पर भी चर्चा हो रही है।
रिसर्च और भविष्य की दिशा


सम्मेलन में भविष्य की तकनीकों पर भी चर्चा की गई:
- AI आधारित कैंसर डिटेक्शन
- जीन थेरेपी
- रोबोटिक सर्जरी
- प्रिसिजन मेडिसिन
👉 ये तकनीकें आने वाले समय में कैंसर इलाज को पूरी तरह बदल सकती हैं।
राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व
यह सम्मेलन न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ेगा
- नई तकनीकें भारत में आएंगी
- डॉक्टरों को वैश्विक अनुभव मिलेगा
सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक सत्रों की झलक



कैंसर के बदलते स्वरूप और नई चुनौतियाँ
पिछले कुछ दशकों में कैंसर का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां कैंसर को एक “घातक और लगभग लाइलाज बीमारी” माना जाता था, वहीं अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इसे काफी हद तक नियंत्रित करने योग्य बना दिया है।
AIIMS जोधपुर के इस सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज कैंसर केवल एक बीमारी नहीं बल्कि कई प्रकार की बीमारियों का समूह है, जिनकी प्रकृति, कारण और उपचार अलग-अलग होते हैं।
मुख्य बिंदु:
- पहले कैंसर की पहचान देर से होती थी, अब शुरुआती स्टेज में डिटेक्शन संभव
- अलग-अलग अंगों के कैंसर का व्यवहार पूरी तरह भिन्न
- जीवनशैली आधारित कैंसर (Lifestyle Cancers) तेजी से बढ़ रहे हैं
- युवा वर्ग में कैंसर के मामले बढ़ना एक चिंताजनक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कैंसर का इलाज “वन-साइज-फिट्स-ऑल” नहीं रहेगा, बल्कि हर मरीज के लिए अलग उपचार योजना तैयार करनी होगी।
प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine) की भूमिका
प्रिसिजन मेडिसिन इस सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण रहा। इसमें मरीज के जीन, पर्यावरण और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए इलाज किया जाता है।
यह कैसे काम करता है?
- मरीज के DNA की जांच
- कैंसर सेल्स की जेनेटिक प्रोफाइलिंग
- उस आधार पर दवाओं का चयन
लाभ:
- उपचार की सफलता दर बढ़ती है
- अनावश्यक दवाओं से बचाव
- साइड इफेक्ट्स कम होते हैं
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में भी अब जीनोमिक टेस्टिंग धीरे-धीरे सस्ती और सुलभ हो रही है, जिससे यह तकनीक आम मरीजों तक पहुँच सकती है।
AI और मशीन लर्निंग का उपयोग
AI आधारित कैंसर पहचान



कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब कैंसर उपचार में एक गेम-चेंजर बनती जा रही है।
उपयोग के क्षेत्र:
- एक्स-रे, CT स्कैन, MRI की तेज और सटीक रिपोर्टिंग
- कैंसर के शुरुआती संकेत पहचानना
- उपचार योजना बनाना
- मरीज के परिणामों का पूर्वानुमान
उदाहरण:
AI मॉडल अब कुछ सेकंड में हजारों इमेज स्कैन कर सकते हैं और डॉक्टर को संभावित कैंसर संकेतों के बारे में बता सकते हैं।
इससे न केवल समय बचता है बल्कि मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम होती है।
भारत में स्वास्थ्य ढांचे की चुनौतियाँ
सम्मेलन में यह भी चर्चा हुई कि आधुनिक तकनीकों के बावजूद भारत में कई चुनौतियाँ मौजूद हैं:
प्रमुख समस्याएँ:
- ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
- कैंसर स्क्रीनिंग की सीमित सुविधा
- महंगा इलाज
- जागरूकता की कमी
समाधान:
- टेलीमेडिसिन का विस्तार
- सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन
- मेडिकल शिक्षा में सुधार
- सस्ती दवाओं की उपलब्धता
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि “टेक्नोलॉजी + नीति + जागरूकता” का संयोजन ही इस समस्या का समाधान है।
नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भूमिका
कैंसर उपचार में केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उनकी जिम्मेदारियाँ:
- मरीज की देखभाल
- दवाओं का सही प्रबंधन
- भावनात्मक समर्थन
- उपचार के दौरान निगरानी
सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि वे कैंसर मरीजों की जटिल जरूरतों को समझ सकें।
मानसिक स्वास्थ्य और कैंसर
मरीजों को मानसिक सहयोग



कैंसर केवल शारीरिक बीमारी नहीं है, यह मानसिक रूप से भी मरीज को प्रभावित करता है।
आम समस्याएँ:
- डर और चिंता
- अवसाद (Depression)
- भविष्य को लेकर अनिश्चितता
समाधान:
- काउंसलिंग
- सपोर्ट ग्रुप
- परिवार का सहयोग
विशेषज्ञों ने कहा कि “मेंटल हेल्थ सपोर्ट” कैंसर उपचार का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।
क्लिनिकल ट्रायल्स का महत्व
क्लिनिकल ट्रायल्स नई दवाओं और उपचारों के परीक्षण के लिए जरूरी होते हैं।
क्यों जरूरी हैं?
- नई दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता जांचना
- बेहतर इलाज विकसित करना
- मरीजों को नई तकनीकों तक पहुंच देना
चुनौतियाँ:
- लोगों में डर और गलतफहमियाँ
- कम भागीदारी
- नियामक प्रक्रियाएँ
AIIMS जोधपुर इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
कैंसर की रोकथाम (Prevention)
रोकथाम के उपाय:
- धूम्रपान और तंबाकू से बचाव
- स्वस्थ आहार
- नियमित व्यायाम
- समय-समय पर जांच
विशेषज्ञों का कहना है कि “कैंसर का इलाज करने से बेहतर है उसे रोकना।”
बाल कैंसर (Pediatric Oncology)
बच्चों में कैंसर के मामलों पर भी चर्चा हुई।
मुख्य बिंदु:
- बच्चों में कैंसर का इलाज संभव है
- समय पर पहचान जरूरी
- विशेष देखभाल और सपोर्ट की आवश्यकता
बुजुर्गों में कैंसर
बढ़ती उम्र के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ता है।
चुनौतियाँ:
- अन्य बीमारियों के साथ इलाज
- शरीर की कमजोर प्रतिरोधक क्षमता
- दवाओं के साइड इफेक्ट्स
इसलिए बुजुर्ग मरीजों के लिए अलग उपचार रणनीति जरूरी होती है।
💊 दवाओं की उपलब्धता और लागत
कैंसर का इलाज अक्सर महंगा होता है।
समाधान:
- जेनेरिक दवाओं का उपयोग
- सरकारी योजनाएं (जैसे आयुष्मान भारत)
- बीमा कवरेज
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
AIIMS जोधपुर का यह सम्मेलन भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत बनाता है।
फायदे:
- नई तकनीकों का आदान-प्रदान
- संयुक्त रिसर्च
- बेहतर उपचार पद्धतियाँ
भविष्य की दिशा
आने वाले समय में:
- AI आधारित डायग्नोसिस
- पर्सनलाइज्ड मेडिसिन
- रोबोटिक सर्जरी
- जीन एडिटिंग
ये सभी तकनीकें कैंसर उपचार को और अधिक प्रभावी बनाएंगी।
उन्नत कैंसर उपचार और टेक्नोलॉजी का उपयोग


भारत में कैंसर उपचार का इकोसिस्टम (Cancer Care Ecosystem)
कैंसर का इलाज केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है। यह एक पूरे इकोसिस्टम पर निर्भर करता है जिसमें कई स्तर शामिल होते हैं:
1. प्राइमरी लेवल (Primary Care)
- गांव और छोटे शहरों में हेल्थ सेंटर
- शुरुआती लक्षण पहचान
- बेसिक स्क्रीनिंग
👉 समस्या: यहाँ डॉक्टरों और उपकरणों की कमी है
2. सेकेंडरी लेवल (District Hospitals)
- सामान्य जांच और रेफरल
- बेसिक ट्रीटमेंट
👉 चुनौती: विशेषज्ञों की कमी
3. टर्शियरी लेवल (AIIMS जैसे संस्थान)
- एडवांस इलाज
- रिसर्च
- क्लिनिकल ट्रायल
👉 यही वह स्तर है जहाँ AIIMS जोधपुर जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
कैंसर डेटा मैनेजमेंट और रजिस्ट्रियाँ
सम्मेलन में डेटा आधारित निर्णय (Data-driven decisions) पर विशेष चर्चा हुई।
Cancer Registries क्या होती हैं?
- मरीजों का डेटा संग्रह
- बीमारी के पैटर्न का विश्लेषण
- नीति निर्माण में उपयोग
भारत में जरूरत:
- राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत डेटा सिस्टम
- रियल-टाइम रिपोर्टिंग
- AI आधारित डेटा एनालिसिस
👉 इससे भविष्य में कैंसर के ट्रेंड को पहले ही समझा जा सकेगा।
🧬 बायोमार्कर और डायग्नोस्टिक्स में क्रांति
बायोमार्कर टेस्टिंग



बायोमार्कर ऐसे संकेतक होते हैं जो बताते हैं कि शरीर में कैंसर मौजूद है या नहीं।
प्रमुख प्रकार:
- Genetic biomarkers
- Protein biomarkers
- Liquid biopsy
Liquid Biopsy क्या है?
- खून के सैंपल से कैंसर का पता
- बिना सर्जरी के जांच
- शुरुआती स्टेज में पहचान
👉 यह भविष्य का सबसे बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है।
रेडिएशन थेरेपी में नई तकनीकें
आधुनिक रेडिएशन तकनीक:
- IMRT (Intensity-Modulated Radiation Therapy)
- IGRT (Image-Guided Radiation Therapy)
- Proton Therapy
फायदे:
- सटीक टार्गेटिंग
- स्वस्थ टिशू को कम नुकसान
- बेहतर परिणाम
AIIMS जैसे संस्थानों में इन तकनीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है।
रोबोटिक सर्जरी का विस्तार
रोबोटिक कैंसर सर्जरी

रोबोटिक सर्जरी अब कैंसर उपचार में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
कैसे काम करती है?
- सर्जन कंप्यूटर से रोबोट को नियंत्रित करता है
- माइक्रो-लेवल पर सटीक ऑपरेशन
लाभ:
- कम दर्द
- जल्दी रिकवरी
- कम ब्लीडिंग
फार्मास्यूटिकल इनोवेशन
कैंसर दवाओं में भी तेजी से बदलाव हो रहा है।
नई दवाओं के प्रकार:
- Monoclonal antibodies
- CAR-T therapy
- Small molecule inhibitors
CAR-T Therapy:
- मरीज के T-cells को modify करके कैंसर से लड़ाना
- बहुत ही उन्नत और प्रभावी तकनीक
हेल्थकेयर इंडस्ट्री और निवेश
सम्मेलन में हेल्थ सेक्टर में निवेश पर भी चर्चा हुई।
निवेश के क्षेत्र:
- कैंसर अस्पताल
- रिसर्च लैब
- मेडिकल स्टार्टअप
भारत में अवसर:
- बड़ी जनसंख्या
- बढ़ती मांग
- सरकारी समर्थन
टेलीऑन्कोलॉजी (Tele-Oncology)
ऑनलाइन कैंसर कंसल्टेशन



टेलीमेडिसिन का उपयोग कैंसर उपचार में भी बढ़ रहा है।
फायदे:
- दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ सलाह
- यात्रा की जरूरत कम
- समय की बचत
मेडिकल एजुकेशन और ट्रेनिंग
बदलाव:
- सिमुलेशन आधारित ट्रेनिंग
- वर्चुअल रियलिटी (VR)
- लाइव सर्जरी डेमो
👉 इससे नए डॉक्टरों को बेहतर ट्रेनिंग मिल रही है।
एथिक्स और कानून
कैंसर उपचार में नैतिकता भी महत्वपूर्ण है।
मुद्दे:
- मरीज की सहमति
- डेटा प्राइवेसी
- महंगे इलाज की उपलब्धता
समाज और जागरूकता
जागरूकता अभियान:
- स्कूल और कॉलेज कार्यक्रम
- मीडिया कैंपेन
- सोशल मीडिया
👉 जागरूकता से कैंसर के मामलों में कमी लाई जा सकती है।
ग्रामीण भारत में कैंसर
समस्याएँ:
- जांच की कमी
- जागरूकता की कमी
- देर से इलाज
समाधान:
- मोबाइल हेल्थ यूनिट
- कैंप आधारित स्क्रीनिंग
- लोकल डॉक्टर ट्रेनिंग
शहरी भारत में चुनौतियाँ
- प्रदूषण
- तनाव
- अनहेल्दी लाइफस्टाइल
👉 यह भी कैंसर के बड़े कारण बन रहे हैं।
जीवनशैली और कैंसर
स्वस्थ आदतें:
- संतुलित आहार
- योग और व्यायाम
- तनाव नियंत्रण
स्टेम सेल और जीन एडिटिंग
CRISPR तकनीक:
- जीन में बदलाव
- कैंसर सेल्स को खत्म करना
👉 अभी रिसर्च स्टेज में है लेकिन भविष्य उज्ज्वल है।
पॉलिसी और सरकारी पहल
🇮🇳 भारत सरकार की योजनाएँ:
- आयुष्मान भारत
- राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम
👉 इनसे गरीब मरीजों को मदद मिलती है।
ग्लोबल तुलना
भारत vs विकसित देश:
| पहलू | भारत | विकसित देश |
|---|---|---|
| लागत | कम | बहुत ज्यादा |
| टेक्नोलॉजी | बढ़ रही | उन्नत |
| जागरूकता | कम | ज्यादा |
डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड
- मरीज का पूरा डेटा डिजिटल
- डॉक्टर को तुरंत जानकारी
- बेहतर इलाज
निर्णय लेने में AI
AI अब डॉक्टरों की मदद कर रहा है:
- कौन सा इलाज बेहतर होगा
- किस मरीज में रिस्क ज्यादा है
भविष्य की हेल्थकेयर विजन
आने वाले 10 साल:
- कैंसर जल्दी पकड़ा जाएगा
- इलाज सस्ता होगा
- मृत्यु दर कम होगी
कैंसर देखभाल में इंसानी संवेदनाएँ और तकनीक का मेल



मरीज अनुभव (Patient Journey) – शुरुआत से इलाज तक
कैंसर का सफर केवल मेडिकल नहीं बल्कि एक भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक यात्रा होता है। सम्मेलन में इस “Patient Journey Mapping” पर गहराई से चर्चा हुई।
मरीज का पूरा सफर:
- लक्षण की शुरुआत
- शरीर में बदलाव
- अक्सर नजरअंदाज किया जाता है
- पहली जांच
- लोकल डॉक्टर
- गलत या अधूरी डायग्नोसिस का खतरा
- स्पेशलिस्ट तक पहुंच
- बड़े शहरों में रेफरल
- समय और पैसे की चुनौती
- डायग्नोसिस कन्फर्मेशन
- बायोप्सी
- स्कैन
- इलाज की शुरुआत
- सर्जरी / कीमो / रेडिएशन
- रिकवरी और फॉलोअप
👉 इस पूरे प्रोसेस में सबसे बड़ा मुद्दा है: Delay (देरी)
और यही देरी कई बार जानलेवा साबित होती है।
“Time is Cancer” – समय का महत्व
सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण लाइन बार-बार दोहराई गई:
“Cancer doesn’t wait — and neither should we.”
इसका मतलब:
- जितनी जल्दी पहचान, उतना बेहतर इलाज
- हर दिन की देरी से बीमारी बढ़ती है
👉 इसलिए भविष्य में “Fast-track diagnosis systems” बनाने पर जोर दिया गया।
डॉक्टर–मरीज संबंध में बदलाव
डॉक्टर और मरीज संवाद


पहले डॉक्टर केवल इलाज बताते थे, लेकिन अब भूमिका बदल रही है:
नया मॉडल:
- Shared decision making
- मरीज को हर विकल्प समझाना
- पारदर्शिता
क्यों जरूरी?
- मरीज का भरोसा बढ़ता है
- इलाज का पालन बेहतर होता है
होम-बेस्ड कैंसर केयर (Home-based Care)
एक बड़ा बदलाव जो चर्चा में आया — घर पर इलाज (Home Oncology Care)
इसमें क्या शामिल है:
- घर पर कीमोथेरेपी
- नर्स विजिट
- ऑनलाइन मॉनिटरिंग
फायदे:
- अस्पताल का बोझ कम
- मरीज को आराम
- संक्रमण का खतरा कम
👉 यह मॉडल भविष्य में तेजी से बढ़ सकता है।
कैंसर सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स
कैंसर इलाज केवल डॉक्टर और दवा तक सीमित नहीं है — इसके पीछे एक बड़ा लॉजिस्टिक नेटवर्क होता है।
इसमें शामिल:
- दवाओं की सप्लाई
- रेडियोथेरेपी उपकरण
- ब्लड और टेस्ट सैंपल
समस्या:
- ग्रामीण क्षेत्रों में देरी
- कोल्ड चेन मैनेजमेंट
👉 समाधान: डिजिटल ट्रैकिंग + AI आधारित सप्लाई सिस्टम
रियल-वर्ल्ड डेटा (Real World Evidence)
अब केवल क्लिनिकल ट्रायल ही नहीं, बल्कि “Real World Data” भी महत्वपूर्ण हो गया है।
इसमें क्या होता है:
- असली मरीजों का डेटा
- इलाज के बाद के परिणाम
- साइड इफेक्ट्स
💡 फायदा:
- बेहतर पॉलिसी
- ज्यादा सटीक इलाज
केयरगिवर (Caregiver) की भूमिका
परिवार का सहयोग


कैंसर मरीज के साथ एक और “अनदेखा हीरो” होता है — Caregiver (परिवार/दोस्त)
उनकी जिम्मेदारियाँ:
- दवा देना
- डॉक्टर के पास ले जाना
- मानसिक समर्थन
चुनौतियाँ:
- मानसिक तनाव
- आर्थिक दबाव
- थकान
👉 सम्मेलन में “Caregiver Support Programs” की जरूरत पर जोर दिया गया।
इंश्योरेंस और फाइनेंशियल प्लानिंग
कैंसर इलाज = महंगा
समाधान:
- हेल्थ इंश्योरेंस
- सरकारी योजनाएं
- NGO सहायता
समस्या:
- कई लोग बीमा नहीं लेते
- क्लेम प्रक्रिया जटिल
👉 भविष्य में “Simplified Insurance Models” पर काम हो रहा है।
पोषण (Nutrition) की भूमिका
क्यों जरूरी?
- शरीर को ताकत
- साइड इफेक्ट कम
क्या खाना चाहिए:
- प्रोटीन
- ताजे फल
- हरी सब्जियां
👉 हर मरीज के लिए अलग डाइट प्लान जरूरी है।
कैंसर और वैकल्पिक चिकित्सा
क्या उपयोगी है?
- योग
- ध्यान (Meditation)
- आयुर्वेद (कुछ मामलों में)
👉 लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना कुछ भी नहीं करना चाहिए।
डिजिटल हेल्थ ऐप्स
हेल्थ ऐप मॉनिटरिंग



अब मोबाइल ऐप भी कैंसर इलाज में मदद कर रहे हैं।
फीचर्स:
- दवा रिमाइंडर
- रिपोर्ट ट्रैकिंग
- डॉक्टर से चैट
अंतिम गहराई वाला निष्कर्ष
AIIMS जोधपुर का यह सम्मेलन हमें यह सिखाता है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई केवल दवा या सर्जरी से नहीं जीती जा सकती।
यह एक 360° अप्रोच है जिसमें शामिल हैं:
- विज्ञान
- तकनीक
- समाज
- परिवार
- और सबसे महत्वपूर्ण — मरीज की इच्छाशक्ति
अधिक जानकारी के लिए AIIMS Jodhpur Official Website देखें।
